किसानों की नई रणनीति अब हरियाणा के किसान लगाएंगे अपने घरों में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की फोटो आंदोलन को लेकर छिड़ी है बात!

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किसानों की नई रणनीति अब हरियाणा के किसान लगाएंगे अपने घरों में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की फोटो आंदोलन को लेकर छिड़ी है बात!

आंदोलन कर रहे किसान अब  नई रणनीति खेलने जा रहे हैं तीन कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के विरोध में कर रहे आंदोलनकारी किसानों ने अब अपने घरों में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की फोटो लगाना शुरू कर दिए जाट राजनीति का टेक लगाने के बाद अब किसानों ने भी अन्य वर्गों तक भी पहुंचाने की कोशिश की है अगर बात करें कि इसके तहत शनिवार को भी किसानों की एक पंचायत बुलाई गई है जो कि दलित समुदाय के लोग भी शामिल हुए हरियाणा के हिसार में जिले के बाहर वाला कस्बे में भी यह पंचायत हुई है

इस पंचायत में किसान यूनियन के लीडर भी मौजूद रहे गुरनाम चंदू भी इस महापंचायत की मीटिंग में लंबे समय से संघर्ष कर रहे लोगों के लिए कई समुदाय के लोग दलित आबादी के 20 फ़ीसदी लोग जाट और सैनी यादव जैसे समुदाय के लोग भी शामिल हुए हैं इस राजनीति को लेकर किसानों ने घर गर्मजोशी का माहौल देखने को मिला है आंदोलनकारी किसानों ने कई अपने फैसले लिए हैं और फैसले को मजबूत करने के लिए अब भीमराव अंबेडकर जी की फोटो अपने घरों में लगायेंगे

इस महापंचायत में दलितों और जाटों के बीच संबंध स्थापित करने को लेकर भी बात हुई है बात करें इस महापंचायत में तो प्रस्ताव भी यह पारित हुआ है कि किसान अपने घरों में दलित आइकन बनाना चाहते हैं बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी की तस्वीरें लगाकर इसके अलावा भी हम बात करें कि दलितों को अपने घरों में सर छोटू राम की तस्वीरें लगाने के लिए भी आग्रह किया जा रहा है सर छोटू राम को जाटों के बीच एक आइकन के तौर पर देखा जाता है यदि यह फोटो लगाई गई तो उन्हें और भी जाट और दलितों में संबंध बढ़ जाएंगे आइकन के रूप में यह काम होगा!

गुरनाम चंदूनी इस पंचायत के बीच में कहा कि हमारी लड़ाई सिर्फ केंद्र सरकार के खिलाफ नहीं है  पूंजीवाद  के भी खिलाफ हमारी लड़ाई है उन्होंने कहा कि आज भी केंद्र सरकार हमें बांटने में जुटी हुई है कभी यह बंटवारा जाति के नाम पर भी कर देती है तो कभी मजहब के नाम पर हम केंद्र सरकार की साजिशों को बखूबी समझते हैं और इससे लड़ते रहेंगे

यही भी नहीं किसानों ने मिलकर इस मीटिंग में आंदोलन को दूसरे राज्य तक पहुंचाने की भी बात कही है चंदनी जी ने कहा है कि हम सभी मिलकर हरियाणा और पंजाब में भी इस महा मीटिंग को करने की भी जरूरत नहीं है हम इस आंदोलन को दूसरे राज्यों तक ले जाना चाहेंगे उन्होंने यह भी कहा कि यदि हम मजदूरों को यह समझना होगा कि तीन कृषि कानून के खिलाफ लड़ाई सिर्फ किसानों की नहीं है

बल्कि इससे मजदूर भी प्रभावित होते हैं इसलिए हम लोगों को अपील करनी है कि इस महा आंदोलन को हिस्सा मजदूरों को भी बनाएं यहां तक कि भी उन्होंने आगामी चुनाव होने वाला है ग्राम प्रधान पंचायतों का भी जिक्र करते हुए इस मीटिंग में मौजूद लोगों से भी अपने अपील को बीजेपी को छोड़ आप लोग किसी को भी वोट कर सकते हैं यदि आप और बीजेपी को करते हैं तो ऐसे ही पता नहीं कितने किसान आंदोलन करने पड़ जाएंगे इसलिए आप पंचायत के चुनाव में बीजेपी को वोट ना करें!

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